मायावती को मूर्तियों पर खर्च पैसे लौटना पड़ेगा: सुप्रीम कोर्ट

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मायावती को मूर्तियों पर खर्च पैसे लौटना पड़ेगा: सुप्रीम कोर्ट
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आगामी लोक सभा चुनाव से ठीक पहले सुप्रीम कोर्ट से बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने एक टिप्पणी करते हुए कहा कि मायावती को मूर्तियों पर खर्च पैसा लौटाना चाहिए। इन मूर्तियों में हाथियों और खुद मायावती की मूर्तियां भी शामिल है। नोएडा में लगी हाथी की मूर्तियों के मामले में सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने मायावती के वकील को राय देते हुए कहा कि अपने क्लाइंट को बता दीजिए कि उन्हें मूर्तियों पर खर्च जनता के पैसों को सरकारी खजाने में वापस करना होगा। मामले की अगली सुनवाई दो अप्रैल को होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक याचिका की सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपनी और हाथियों की मूर्तियां बनाने में जितना जनता का पैसा खर्च किया है, उसे वापस करना चाहिए। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रंजन गोगोई कर रहे थे। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुआई में सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा, “यह हमारा विचार है कि मैडम मायावती, इन हाथियों के लिए खर्च की गई सरकारी राशि की प्रतिपूर्ति करें।” बता दे कि सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले भी 2015 में उत्तर प्रदेश की सरकार से पार्क और मूर्तियों पर खर्च हुए सरकारी पैसे की जानकारी मांगी थी।

दरअसल मायावती के द्वारा उत्तर प्रदेश में बसपा शासनकाल में कई पार्कों का निर्माण करवाया गया। इन पार्कों में बसपा संस्थापक कांशीराम, मायावती और हाथियों की मूर्तियां लगवाई गई थीं। ये मुद्दा इससे पहले भी चुनावों में उठता रहता है और विपक्षी इस मुद्दे पर निशाना साधते हैं। बसपा शासनकाल में ये पार्क लखनऊ, नोएडा समेत अन्य शहरों में बनवाए गए थे। खिलेश सरकार के दौरान लखनऊ विकास प्राधिरकरण (LDA) के रिपोर्ट सामने आया था कि BSP के चुनाव चिन्ह हाथी की पत्थर की 30 मूर्तियां जबकि कांसे की 22 प्रतिमाएं लगवाई गईं थी। इसमें 685 करोड़ का खर्च आया था।