नोटबंदी ने छीनी 50 लाख लोगों की नौकरियां, अब भी नहीं सुधरे हालात: रिपोर्ट

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नोटबंदी छीनी 50 लाख लोगों की नौकरियां अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी

अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी (बेंगलुरू) की ओर से जारी की गई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत में साल 2016 से 2018 तक देश के करीब 50 लाख लोगों की नौकरियां चली गईं. रिपोर्ट के मुताबिक, 8 नवंबर 2016 की आधी रात लागू हुई नोटबंदी के बाद 50 लाख लोगों की नौकरियां चली गई हैं. रिपोर्ट के अनुसार, साल 2016 की तीसरी तिमाही यानी सितंबर 2016 से दिसंबर 2016 के बीच शहरी और ग्रामीण लोगों की लेबर पार्टिशिपेशन फोर्स में भागीदारी अचानक कम होने लगी. इसका मतलब है कि सितंबर 2016 नौकरियों में कमी आने लगी. वहीं 2017 की दूसरी तिमाही में इसकी दर में थोड़ी कम आई, लेकिन बाद में नौकरियों की संख्या लगातार कम होती गई, जिसमें कोई सुधार नहीं हुआ.

रिपोर्ट का दावा है कि अब तक नोटबंदी के बाद बने हालात सुधरे नहीं है. वहीं रिपोर्ट में कहा गया है कि 20-24 आयु वर्ग में सबसे ज्यादा बेरोजगारी है और नोटबंदी से पुरुषों के मुकाबले महिलाएं ज्यादा प्रभावित हुई हैं. सीएसई के अध्यक्ष और रिपोर्ट लिखने वाले मुख्य लेखक प्रोफेसर अमित बसोले ने हफिंगटनपोस्ट से कहा कि, इस रिपोर्ट में कुल आंकड़े हैं. इन आंकड़ों के हिसाब से 50 लाख रोजगार कम हुए हैं. कहीं और नौकरियां भले ही बढ़ी हों लेकिन ये तय है कि पचास लाख लोगों ने अपना नौकरियां खोई हैं. यह अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा नहीं है. रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया है कि नोटबंदी ने सबसे अधिक असंगठित क्षेत्र को ही तबाह किया है.