TISS की रिपोर्ट में खुलासा- बिहार के ज्यादातर शेल्टर होम में शोषण से कई हुए पागल

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बिहार के ज्यादातर शेल्टर होम में शोषण से कई हुए पागल
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सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार के बाद बिहार सरकार ने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज (TISS) द्वारा बिहार के 110 शेल्टर होम की सोशल ऑडिट की 110 पन्नों की पूरी रिपोर्ट को समाज कल्याण विभाग की वेबसाइट पर सार्वजनिक कर दिया है. अब इस रिपोर्ट को कोई भी समाज कल्याण विभाग की वेबसाइट पर जाकर इससे पढ़ सकता है. सोशल ऑडिट की 110 पन्नों की पूरी रिपोर्ट में जो भयानक तथ्य सामने आया है उससे नितीश सरकार के सुशासन के दावों के सच का अंदाजा लगाया जा सकता है. रिपोर्ट में साफ बताया गया है कि कैसे बिहार के शेल्टर होम लड़कियों के लिए किसी नरक से काम नहीं है.

दरअसल, पिछले साल 30 जून को समाज कल्याण विभाग ने बिहार के सभी शेल्टर होम और अल्पावास का सोशल ऑडिट करने का ज़िम्मा TISS को सौंपा था. कई महीनों तक बिहार के अलग-अलग शेल्टर होम और अल्पावासों का सोशल ऑडिट करके अपनी रिपोर्ट 27 अप्रैल, 2018 में विभाग को सौंपी. जिसमें मुजफ्फरपुर शेल्टर होम के साथ बिहार के कुल 15 अल्पावास, बालगृह, बालिका गृह और शेल्टर होम में बड़े स्तर पर अनियमितता सामने आई थी. रिपोर्ट में 17 संस्थानों का जिक्र करते हुए समाज कल्याण विभाग को सुझाव दिया गया है कि इन संस्थानों को लेकर तुरंत एक्शन लेने की जरूरत है.

TISS की रिपोर्ट के मुताबिक़ इन 17 शेल्टर होम पर स्थिति सबसे ज़्यादा भयावह थी. रिपोर्ट के मुताबिक शेल्टर होम में हो रहे शोषण से कई लड़किया पागल सी हो गयी है. वहा रहने वाली कई लड़कियों ने अपने साथ हो रहे शारीरिक और मानसिक शोषण का सच उनको बताया. मुंगेर के अल्पावास गृह की लड़कियों के मुताबिक उनके शौचालयों में कुंडी तक नहीं है. ऑडिट के दौरान टीम ने एक कमरा बंद पाया जब उसे खुलवाया तो उसमे एक महिला और एक बच्ची बैठी थी. अल्पवास गृह के कर्मियों ने दावा किया कि ये पागल हैं लेकिन वो TISS की टीम के एक सदस्य को गले लगाकर रोने लगी.

मुजफ्फरपुर शेल्टर हाउस का जिक्र है जिसमें वहां रहने वाली लड़कियों के हवाले से यौन उत्पीड़न की बात कही गई है. मोतिहारी के बाल गृह के बारे में बताया गया है कि एक बच्चे की गलती पर कैसे सबकी एक साथ पिटाई की जाती है. गया के बाल गृह के बारे में जानकारी दी गई है कि यहां बच्चों को जबरदस्ती कैद करके रखा जाता है. मधेपुरा के अल्पावास गृह में एक लड़की ने दावा किया कि उसे रास्ते से ज़बर्दस्ती उठाकर यहां लाया गया है और वापस नहीं जाने दिया जाता. अल्पावास गृह में बिस्तर तक मौजूद नहीं था और वहां रहने वाली लड़कियों और महिलाओं को ज़मीन पर ही सोना पड़ता है.

मुजफ्फरपुर और गया के सेवा कुटीर में लोगों को काम दिलाने के नाम पर लाया गया और वहीं रख लिया गया, वहां लोगों के साथ मारपीट होती है, अवसाद में लोग मानसिक संतुलन खो रहे हैं. पटना के कौशल कुटीर में महिलाओं और पुरुषों दोनों के ही साथ शारीरिक हिंसा होती है, यहां मौजूद लोगों ने आरोप लगाया कि उन्हें काम दिलाने का झांसा देकर यहा लाया गया और लम्बे समय से यहीं रखा गया है. पटना के अल्पावास गृह की लड़कियों ने दावा किया कि उनके पास उनके घर का पता है, परिजनों के फ़ोन नंबर हैं फिर भी उन्हें घरवालों से बातचीत नहीं करने दिया जाता. इसी अवसाद में एक लड़की ने आत्महत्या कर ली तो दूसरी लड़की पागल हो गई.