सरकार को SC की लताड़, कहा ‘हमारा काम समस्याओं को सुलझाना है ना कि सरकार की आलोचना करना’

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संयम बरतने टिप्पड़ी पर सरकार को सुप्रीम कोर्ट की फटकार
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सुप्रीम कोर्ट बुधवार को देश की 1382 जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों के कारण उत्पन्न अमानवीय स्थितियों पर एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार को लताड़ लगायी. दरअसल सरकार की तरफ से पेश हुए एटार्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल चाहते थी कि शीर्ष अदालत जनहित याचिका पर सुनवाई करने के दौरान सरकार पर प्रतिकूल टिप्पणी करने में ‘संयम’ बरते. शीर्ष अदालत ने साफ किया कि उसका उद्देश्य समस्याओं को सुलझाना है ना कि सरकार की आलोचना करना. कोर्ट ने कहा कि हम केवल जनता के अधिकारों को लागू कर रहे हैं, हम अनुच्छेद 21 की अवहेलना नहीं कर सकते.

न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अदालत के आदेश के कारण ही कई विकास कार्य हुए हैं. पीठ ने कहा कि आपको केवल अपने अधिकारियों से संसद के बनाए कानूनों का पालन करने के बारे में कहना चाहिए. वेणुगोपाल ने कोर्ट में कहा कि अदालत निजी जनहित याचिकाओं की सुनवाई में वित्तीय प्रभावों के बारे में समझे बिना आदेश जारी कर देती है. वेणुगोपाल ने शीर्ष अदालत के ऐसे निर्णयों की जानकारी देने वाली समाचार पत्रों की सुर्खियों का हवाला दिया. सरकार के 80 – 90 कल्याण कार्यक्रम एक साथ चल रहे हैं. अदालत एक मुद्दे पर सुनवाई कर आदेश दे देती है लेकिन उसके लिए फंड कहां से आएगा.

न्यायमूर्ति लोकुर ने उन्हें जवाब देते हुए कहा कि यह अदालत का आदेश ही है जिसके कारण सरकार को गैरकानूनी खनन के लिए पर्यावरण निधि के रूप में 1,50,000 करोड़ रुपये मिले हैं. अदालत ने यह जानना चाहा कि यह राशि अभी तक खर्च क्यों नहीं की गई. अदालत ने कहा कि हम यह स्पष्ट कर रहे हैं कि हमने सभी चीजों के लिए सरकार की आलोचना नहीं की और न ही करते हैं. उन्होंने कहा कि हम भी इस देश के नागरिक हैं. ऐसी धारणा मत दीजिए कि हम सरकार की आलोचना कर रहे हैं और उसे काम करने से रोक रहे हैं. पीठ ने कहा कि अदालत के आदेश के कारण ही कई विकास कार्य हुए हैं.