कावंड़ियों के उत्पात पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- ‘उचित कार्रवाई कीजिए’

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कावंड़ियों के उत्पात पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
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कांवड़ियों के उत्पात के कई मामले सामने आने के बाद अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुच गया है. प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ की पीठ ने मामले पर चिंता जताई. पीठ ने पुलिस को आदेश दिया कि वह उन कांवड़ियों पर उचित कार्रवाई करे जो उत्‍पात मचाते हैं और कानून अपने हाथ में लेते हैं. अटॉनी जनरल के.के. वेणुगोपाल ने कांवड़ियों द्वारा गत दो दिनों में किए गए उत्पात के बारे में उल्लेख किया, जिसमें हमला करने की घटनाएं और वाहनों को पटलने के हिंसक कार्य शामिल हैं.

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि इलाहाबाद में नेशनल हाईवे के एक हिस्से को पांच घंटों तक कावंडियों के लिए बंद कर दिया गया. अटॉनी जनरल ने कहा कि किसी भी मुद्दे पर विरोध के लिए कुछ नियम होने चाहिए, क्योंकि किसी फ़िल्म का विरोध हो या किसी सामाजिक राजनीतिक मुद्दे पर प्रदर्शन… लोग सड़कों पर उतर कर हिंसक प्रदर्शन करने लगते हैं. कभी एससी/एसटी के मुद्दे पर हाइवे को बंद कर दिया जाता है तो कभी कावड़ियों रास्ते जाम कर देते है. कोर्ट इस मामले में गाइडलाइन जारी करे.

सुप्रीम कोर्ट के 2009 के दिशानिर्देश के अनुसार विरोध प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए प्रदशर्नकारी के नेता को जवाबदेह बनाने के आदेश दिए गए थे. इस आदेश की ओर इशारा करते हुए प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने कहा कि उन्होंने गौरक्षक समूहों द्वारा लिंचिंग की घटना से निपटने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं और किसी के भी द्वारा तोड़-फोड़ की घटना के लिए भी ऐसे ही दिशानिर्देश लागू होंगे. घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, “जो दूसरे की संपत्ति जलाते हैं, वे अपने घरों को क्यों नहीं जलाते. आप अपने घर जलाएं.”