सरदार पटेल की प्रतिमा में नियमो के खिलाफ लग रहा तेल कंपनियां का पैसा: CAG

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सरदार पटेल प्रतिमा तेल कंपनियां पैसे लगाने कैग उठाये सवाल
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कंपट्रोलर और ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया ने 7 अगस्त 2018 को संसद में रखी गई अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि सरकारी तेल कंपनियों द्वारा इतनी बड़ी रकम सरदार पटेल की प्रतिमा के लिए खर्च किया जाना गलत है. सीएजी रिपोर्ट में बताय गया है कि ओएनजीसी ने 50 करोड़ रुपये, इंडियन ऑयल ने 21.83 करोड़ रुपये, बीपीसीएल, एचपीसीएल और ओआईएल ने 25 करोड़ रुपये वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान इस प्रतिमा पर अपने सीएसआर फंड से योगदान किया है.

सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि सीएसआर नियमों के तहत कोई भी कंपनी किसी राष्ट्रीय धरोहर को बचाने के लिए सीएसआर फंड का इस्तेमाल कर सकती है लेकिन सरदार पटेल की निर्माणाधीन प्रतिमा राष्ट्रीय धरोहर नहीं है. लिहाजा, तेल कंपनियों द्वारा इस प्रतिमा के लिए किसी तरह का योगदान नियमों के खिलाफ है. रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि सरकारी तेल कंपनियों द्वारा इतनी बड़ी रकम सरदार पटेल की प्रतिमा के लिए खर्च किया जाना गलत है.

आपको बता दे कि 2,989 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट के तहत सरदार पटेल की 182 मीटर कांसे की प्रतिमा का निर्माण, मेमोरियल, गार्डेन और श्रेष्ठ भारत भवन नाम से एक कन्वेंशन सेंटर का निर्माण किया जाना है. वहीं शुरुआत में इस प्रोजेक्ट के लिए कुल 2,063 करोड़ रुपये का बजट आंका गया था लेकिन अक्टूबर 2014 में पड़े टेंडर के बाद लार्सन और टूब्रो को 2,989 करोड़ रुपये में प्रतिमा के निर्माण की जिम्मेदारी दी गई.

गौरतलब है कि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के नाम से प्रस्तावित सरदार पटेल की इस प्रतिमा को बनाने के लिए सरकार की तरफ से प्रचार किया जा रहा है कि – स्टैच्यू ऑफ यूनिटी- लोहा कैंपेन-कहानी हर गांव की यानी प्रतिमा को बनाने के लिए जरूरी लोहा देश के कोने-कोने से आम आदमी द्वारा दिया जा रहा है. स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की वेबसाइट पर दावा किया गया है कि देशभर के किसानों से अभीतक 1 लाख 69 हजार लोहे के उपकरण एकत्र कर लिए गए हैं.