नागेश्वर राव को 1 लाख का जुर्माना और दिनभर कोर्ट में खड़े रहने की सजा

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कोर्टअवमानना मामले में नागेश्वर राव को 1 लाख का जुर्माना
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कोर्ट की अवमानना मामले में सीबीआई के पूर्व अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव को दोषी ठहराया गया है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने नाराजगी जताते हुए कहा कि लीगल एडवाइज़र ने कहा था कि एके शर्मा का ट्रांसफ़र करने से पहले सुप्रीमकोर्ट में हलफ़नामा दायर कर इजाज़त मांगी जाए, लेकिन ऐसा क्यों नहीं किया गया। सीजेआई ने सुनवाई के दौरान कहा कि आप दोषी हैं और हम 30 दिन तक जेल भी भेज सकते हैं। लेकिन एटॉर्नी जनरल के बार बार आग्रह माफी देने का आग्रह किया, 30 साल का बेदाग और सम्मानित करियर को ध्यान में रखते हुए चीफ जस्टिस ने नागेश्वर राव पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया, इसके अलावा जब तक कोर्ट की कार्यवाही (आज) चलेगी तब तक नागेश्वर राव और दूसरे अधिकारी को कॉर्नर में बैठना होगा।

दरअसल बिहार के मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड में कोर्ट की अवमानना का सामना कर रहे सीबीआई के पूर्व अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव को सुप्रीम कोर्ट ने आर्थिक सजा सुनाई है। मंगलवार को मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने नागेश्वर राव के माफीनामे को नामंजूर कर दिया। सीबीआई की तरफ से अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने दलील रखी कि नागेश्वर राव ने माफी मांगी है और उन्होंने जानबूझकर सुप्रीमकोर्ट की अवमानना नहीं की है। चीफ जस्टिस ने नाराजगी जताते हुए कहा कि लीगल एडवाइज़र ने कहा था कि एके शर्मा का ट्रांसफ़र करने से पहले सुप्रीमकोर्ट में हलफ़नामा दायर कर इजाज़त मांगी जाए, लेकिन ऐसा क्यों नहीं किया गया। सीजेआई ने कहा कि ट्रांसफर करने से पहले कोर्ट में एफिडेविट देना चाहिए था।