कम्प्यूटर बाबा मंत्री पद छोड़ने पर बोले-शिवराज सरकार धर्मविरोधी

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कम्प्यूटर बाबा छोड़ा मंत्री पद,खायी बीजेपी को हराने की कसम
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पंचायत आजतक के तीसरे सत्र ‘नर्मदा के नाम पर’ में महामंडलेश्वर कम्प्यूटर बाबा ने शिरकत की. इस सत्र के दौरान कंम्प्यूटर बाबा ने कहा कि सरकार में शामिल होने से पहले उन्होंने नर्मदा को स्वच्छ करने, मठ-मंदिरों को सुरक्षित करने, पेड़-पौधे लगाने और नर्मदा के अवैध खनन को रोकने की शर्त रखी लेकिन 6 महीने के कार्यकाल के बाद मुख्यमंत्री शिवराज इन वादों पर ध्यान नहीं दिया. उन्होंने खुलासा किया है कि जब सरकार में मंत्री बनने के बाद उन्होंने नर्मदा का अवैध खनन रोकने को कहा तो शिवराज ने कहा कि चुनाव का टाइम है सरकार को खतरा हो जाएगा. इसी बात से नाराज कंप्यूटर बाबा ने मंत्री पद छोड़ दिया और बीजेपी को हराने की कसम खाली.

कप्यूटर बाबा ने कहा, शिवराज सरकार को मध्य प्रदेश में राज करते-करते 15 वर्ष हो गए. इन्होंने संतों को ऐसे मढ़ दिया है कि संतों के बारे में कहा जाता है कि वे बीजेपी के हैं, आरएसएस के हैं. चित्रकूट में संतों की 100 झोपड़ियां तोड़ दी गईं. संत समाज इस सरकार से बेहद दुखी है. हमलोगों ने देख लिया कि यह अधर्म की सरकार है. इसमें धर्म नाम की कोई चीज नहीं है. उन्होंने आगे कहा, अब चुनाव आ गया तो फिर मंदिर बनाएंगे. हम बाबाओं को फिर इकट्ठा करेंगे लेकिन बाबा अब संभल गए हैं. साधु सनातन समझ गए हैं कि ये हमें मूर्ख बनाते हैं. यह सरकार मंदिर बनाने वाली नहीं है. नर्मदा के नाम से, गऊ के नाम से रोटी सेंकेंगे. जीत जाएंगे तो फिर संतों की तरफ देखेंगे भी नहीं.

दरअसल आगामी विधानसभा चुनाव में एक बार फिर मध्य प्रदेश में सत्ता हांसिल करने के लिए जहां शिवराज सिंह चौहान हर संभव प्यास में जुटें हैं तो वहीं उन्हीं के द्वारा मंत्री का दर्जा पाने वाले कंप्यूटर बाबा ने बीजपी को हराने की कसम खा ली है. कंप्यूटर बाबा ने साफ कहा है कि उनका मकसद शिवराज सिंह चौहान को हराना है. कंप्यूटर बाबा का बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा क्योंकि एक वक्त ऐसा था जब मध्य प्रदेश में कंप्यूटर बाबा सीएम शिवराज की तारीफ करते नहीं थकते थे. शिवराज सरकार ने उन्हें मंत्री का दर्जा भी दिया लेकिन अब बाबा के बोल बदल गए हैं. बाबा के मुताबिक संतों की संसद में ही किस पार्टी को समर्थन देना है इसका फैसला लिया जाएगा.