जस्टिस एके सीकरी ने मोदी सरकार का ऑफर ठुकराया, खड़े हुए कई सवाल

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जस्टिस एके सीकरी ने मोदी सरकार का ऑफर ठुकराया
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मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एके सीकरी को लंदन स्थित कॉमनवेल्थ सेक्रेटेरिएट आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल (सीएसएटी) में सदस्य बनने ऑफर दिया है, जिसे जस्टिस एके सीकरी ने ठुकरा दिया है. जस्टिस सीकरी को यह पद छह मार्च को रिटायरमेंट के बाद दिया जाता. उन्हें इस पद की पेशकश पिछले साल की गई थी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दिसंबर के पहले हफ्ते में जस्टिस सीकरी ने इस प्रस्ताव के लिए हामी भर दी थी. लेकिन ये भी कहा जा रहा है कि जब जस्टिस सीकरी ने इस बात की स्वीकृति दी थी तब तक उनको पता नहीं था कि उनको आलोक वर्मा के पद से जुड़े फैसले वाली समिति का सदस्य बनाया जाएगा.

बता दे कि जस्टिस सीकरी के वोट से सीबीआई के निदेशक के पद से आलोक वर्मा को हटाने का फैसला किया गया था. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आलोक वर्मा को हटाने का फैसला उच्चस्तरीय कमेटी ने लिया था. इस कमेटी में चीफ जस्टिस, प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता होते हैं. आलोक वर्मा पर फैसला लेने के लिए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने अपने प्रतिनिधि के तौर पर जस्टिस सीकरी को भेजा था. दरअसल इस समिति के सदस्य के तौर पर जस्टिस गोगोई को जाना था लेकिन चूंकि उन्होंने आलोक वर्मा की याचिका की सुनवाई कोर्ट में की थी इसलिए वो इस समिति का हिस्सा नहीं बन सकते थे.

बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी, जस्टिस एके सीकरी और मल्लिकार्जुन खड़गे की तीन सदस्यीय कमिटी ने 2-1 से आलोक वर्मा को पद से हटाने का फैसला लिया था. सीकरी और पीएम मोदी ने उन्हें हटाने पर मुहर लगाई, जबकि खड़गे इसके विरोध में थे. इसके ठीक तीन दिन बाद जस्टिस सीकरी को सीएसएटी में सदस्य बनने संबंधी ऑफर की खबर आई. ऐसे में कांग्रेस ने जस्टिस सीकरी को मिले इस ऑफर को सीबीआई निदेशक को हटाए जाने पर उनकी सहमति से जोड़ते हुए सरकार से जवाब मांगा था. माना जा रहा है कि इस विवाद के चलते ही सीकरी ने यह प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है.