सरकार मॉब लिंचिंग का ठीकरा सोशल मीडिया कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के सिर फोड़ना चाहती है

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मॉब लिंचिंग : सोशल मीडिया कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों कानून
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मॉब लिंचिंग की देशभर में बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए सरकार एक प्रभावी कानून बनाने पर विचार कर रही है. गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाले मंत्रियों के एक समूह ने बुधवार को उस पैनल की सिफारिशों पर चर्चा की जिसका गठन लिंचिंग की घटनाओं पर काबू की खातिर तरीकों का सुझाव देने के लिए किया गया है. बैठक में कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज समेत दूसरे मंत्री और केंद्रीय गृह सचिव शामिल थे. केंद्रीय गृह सचिव राजीव गौबा की अध्यक्षता वाली सचिवों की समिति की प्रमुख सिफारिशों में से एक, भारत में सोशल मीडिया साइटों के शीर्ष अधिकारियों पर जिम्मेदारी डालना है. नियर ब्यूरोक्रेट्स के एक पैनल ने सरकार को बताया है कि मॉब लिंचिंग की बढ़ती घटनाओं के लिए वॉट्सएप समेत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जिम्मेदार हैं.

गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि जीओएम की यह पहली बैठक थी और मंत्रियों को समिति की सिफारिशों के बारे में जानकारी दी गई. मझा जाता है कि समिति ने संसदीय अनुमोदन के जरिए भारतीय दंड संहिता और दंड प्रक्रिया संहिता में नए प्रावधान शामिल कर कानून को सख्त बनाने की सिफारिश की है. अधिकारी ने बताया कि उम्मीद है कि अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देने के लिए जीओएम अगले कुछ हफ्तों में और बैठकें कर सकता है. आपको बता दे कि जीओएम के सदस्यों में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद और सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत हैं. गृह मंत्री राजनाथ सिंह जीओएम के प्रमुख हैं. बाद में उसे अंतिम फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास भेजा जाएगा.