MP: सरकारी अस्पताल में लापरवाही, तड़पते हुए बच्ची की हुई मौत

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एमपी: सागर संभाग बीएमसी में लापरवाही से बच्ची की मौत

मध्य प्रदेश के सागर संभाग स्थित बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) में अस्पताल प्रंबधन और डॉक्टर्स की लापरवाही ने एक मासूम बच्ची की जान ले ली। बच्ची के गरीब परिजनों के पास प्राइवेट में इलाज कराने के पैसे नहीं थे, इसलिए उन्होंने बीएमसी का रुख किया। लेकिन इलाज कराने पहुंचे मरीज के परिजनों के सामने शिशु रोग विभाग में ड्यूटी में तैनात‌ डॉक्टर ज्योती राउत ने कुछ ऐसी मांग रख दी, जिसे पूरा करना शायद उस गरीब परिवार के बस में नहीं था। डॉक्टर ने पीड़ित के परिजनों से कहा कि एक करोड़ रुपए की वेंटिलेटर मशीन आप के बच्चे के इलाज के लिए चाहिए, आप ला देंगे?

दरअसल कर्रापुर निवासी एक साल की आंशिक अहिरवार 8 फरवरी की सुबह घर में खेलते हुए खौलते पानी में जा गिरी। खौलते पानी में गिरने की वजह से बच्ची बुरी तरह से जल गई। बच्ची को परिजनों ने इलाज के लिए बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के बर्न वार्ड में भर्ती कराया। लेकिन यहां इलाज के अभाव में करीब चार घंटे तक मासूम आंशिक दर्द से तड़पती रही। इस पर जब बच्ची के परिजनों ने डीन से बात की तो उन्होंने सुविधाएं होने और डॉक्टर उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। लेकिन डीन से शिकायत करने पर डॉक्टर व स्टाफ चिड़ गया और उन्होंने इलाज में लापरवाही बरतना शुरू कर दी।

ब्रिजेंद्र कुमार अहिरवार ने कहा कि मेरी भाभी (अंशिका की मां) पूरे समय ऑक्सीजन मास्क पकड़कर बैठी रही, लेकिन प्रबंधन ने एक नर्स तक नहीं दी। वहीं जब इलाज में लापरवाही की शिकायत लेकर डॉक्टर के पास पहुंचे तो उन्होंने 1 करोड़ का वेंटीलेटर लाने की शर्त रख दी। जिस पर हम खामोश हो गए, क्योंकि अगर हमारे पास इतना ही पैसा होता तो सरकारी अस्पताल में इलाज कराने क्यों आते। मेरी भतीजी अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसके साथ जो लापरवाही हुई है, हम उसकी आवाज उठाएंगे। बता दे कि ऐसा पहली बार नहीं है जब मध्य प्रदेश का कोई सरकारी अस्पताल अपनी लापरवाही के चलते चर्चा में आया हो।