देवरिया शेल्टर होम कांड के तार गोरखपुर से जुड़े, चल रहा अवैध वृद्धाश्रम

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देवरिया शेल्टर होम कांड गोरखपुर से जुड़े,चल रहा अवैध वृद्धाश्रम
देवरिया शेल्टर होम कांड के तार गोरखपुर से जुड़े

उत्तर प्रदेश के देवरिया में मां विन्ध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं सामाजिक सेवा संस्थान के नाम से चल रहे इस शेल्टर को भले ही बीती रात सील कर दिया गया हो लेकिन 15 से 18 लड़कियों का अब तक कोई सुराग नहीं है. हालाकि शेल्टर चलाने वाले पति-पत्नी को गिरफ्तार कर लिया गया है. प्रशासनिक और पुलिस अफसरों की प्रारंभिक जांच से पता चला है कि गोरखपुर के खोराबार इलाके में रानीडीहा में गिरिजा त्रिपाठी के निजी मकान में ही अवैध तरीके से वृद्धाश्रम का संचालन किया जा रहा है और जानकारी के बाद भी जिला प्रशासन ने इस अवैध वृद्धाश्रम पर कोई कार्रवाई करना तक जरुरी नहीं समझी.

एनजीओ संचालिका गिरजा त्रिपाठी अपनी ऊंची रसूख की बदौलत लगातार कानून की धज्जिया उड़ाती रही. लोगों पर अपनी धाक जमाने के लिए दफ्तर में संचालिका गिरिजा त्रिपाठी ने सियासातदारों और पुलिस के बड़े अफसरों के साथ खींची गई अपनी फोटों को लगा रखा है. हैरानी की बात ये है कि मान्यता खत्म होने के बाद भी एक साल से अवैध तरीके से वृद्धाश्रम का संचालन किया जा रहा है. वही दूसरी ओर देवरिया के शेल्टर कि भी अनियमितताओं को लेकर सीबीआई जांच चल रही थी और आर्थिक अनुदान बंद कर दिया गया था. इसके बावजूद संचालिका गिरजा त्रिपाठी की ऊंची रसूख के बदौलत उनपर कोई कार्यवाही नहीं हुई.

स्थानीय लोगो ने भी वृद्धाश्रम की आड़ में गलत काम किये जाने की आशंका जताई है, एक स्थानीय युवक ने बताया कि देर रात में लग्जरी कारों में महिला और पुरूष वृद्धा आश्रम में आते हैं. युवक ने कहा है कि वृद्धाश्रम में बुजुर्ग की ठीक से देखभाल नहीं किया जाता है, यहां तककि बुजुर्गों की मौत के बाद उनका अंतिम संस्कार भी ठीक तरीके से नहीं कराया जाता था. लाश को ठिकाने लगाने के लिए टैंपू चालक को कुछ पैसा दिया जाता हैं. युवक ने बताया है कि अधिकारियों के निरीक्षण के वक्त ग्रामीणों को पैसा देकर वृद्धाश्रम में भर्ती कराया जाता है. वृद्धाश्रम का पेपर मांगने पर वह मौजूद लिपिक अंकित मिश्रा लिपिक टाल-मटोल करता रहा.