CAG ने एम्स की स्थापना को लेकर सरकार के दावे को बताया झूठा

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CAG एम्स की स्थापना लेकर सरकार दावे को बताया झूठा
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भारतीय नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की ऑडिट रिपोर्ट में यह सामने आया है कि देश में एम्स जैसी स्वास्थ्य सेवाएं स्थापित करने के लिए प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना को लागू करने की गति काफी सुस्त है जिसके कारण लागत करीब 3 हजार करोड़ रुपये बढ़ गई है. रिपोर्ट में इस दावे को झूठा बताया गया है कि एम्स की स्थापना का काम ‘तेज गति’ से हो रहा है. सीएजी का कहना है कि कई एम्स की स्थापना तय समय से चार से पांच साल पीछे चल रही है. रिपोर्ट में कहा गया है, ‘छह नए एम्स के पास 1,267.41 करोड़ का फंड बिना इस्तेमाल के पड़ा है.

कैग की ऑडिट रिपोर्ट में अपूर्ण परियोजना, प्रशासनिक उदासीनता, कमजोर निगरानी का भी जिक्र किया गया है. सीएजी ने इस योजना को लागू करने में कई खामियों को उजागर किया है. सीएजी की ऑडिट के मुताबिक 2003 से 2017 के बीच इस योजना को लागू करने के मामले में कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं. सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि छह नए एम्स खोलने के लिए साल 2016-17 तक महज 14,970 करोड़ रुपये सरकार द्वारा जारी किए गए हैं. लेकिन धन आवंटन में देरी की वजह से इन पर आने वाली लागत में 2,928 करोड़ रुपये का इजाफा हो गया है.

सीएजी की रिपोर्ट मंगलवार को संसद में पेश की गई थी. सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया है, ‘छह नए एम्स के पास 1,267.41 करोड़ का फंड बिना इस्तेमाल के पड़ा है. इसके अलावा काम में लगी एजेंसियों के पास 393.53 करोड़ रुपये सिविल वर्क के लिए और 437.28 करोड़ रुपये इक्विपमेंट खरीद के लिए बचे हुए हैं.’ सीएजी ने भी प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना को लागू करने में कई खामियों को उजागर करते हुए रिपोर्ट में अपूर्ण परियोजना, प्रशासनिक उदासीनता, कमजोर निगरानी का भी जिक्र किया गया है.

आप को बता दे कि प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना का खाका अगस्त 2003 में वाजपेयी सरकार के दौर में आया था. इस योजना के तहत अब तक छह चरण में कुल 20 नए एम्स की स्थापना और 71 मौजूदा मेडिकल कॉलेजों को अपडेट करने का काम चल रहा है. किन सीएजी की ऑडिट के मुताबिक 2003 से 2017 के बीच इस योजना को लागू करने के मामले में कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं. सीएजी की रिपोर्ट में साफ बताया गया है कि सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का हाल किस तरह से खराब है.