बिहार: गूंगी-बहरी मासूम के साथ रेप, पुलिस-अस्पताल का अमानवीय व्यव्हार

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बिहार: गूंगी-बहरी मासूम के साथ रेप,पुलिस-अस्पताल का अमानवीय व्यव्हार

बिहार में महिलाओं कि सुरक्षा पर तो बड़ा सवाल है ही लेकिन अब बिहार पुलिस और स्वस्थ विभाग के कार्यशैली पर एक बड़ा सवाल खड़ा हुआ है. मुजफ्फरपुर के सकरा थाना इलाके में एक गूंगी-बहरी नाबालिग मासूम को गांव के ही एक मनचले ने अपनी हवस का शिकार बनाया. लड़की के साथ दुष्कर्म की जानकारी होने पर पुलिस को सूचित किया गया, जिसके बाद उसे मेडिकल जांच के लिए सदर अस्पताल ले जाया गया. जहा पीड़िता को सात घंटों तक अस्पताल में इंतजार कराया गया. वजह सिर्फ इतनी कि पुलिस की रिपोर्ट में केस नंबर दर्ज नहीं था. दिव्यांगों के हित में काम कर रहे एक संगठन की कुछ महिलाओं ने जब पटना से आकर दवाब बनाया तब जाकर सात घंटे बाद पीड़िता की मेडिकल जांच की गई.

जानकारी के मुताबिक अस्पताल में बच्ची को शारीरिक तकलीफ के बाद भी मेडिकल जांच के लिए सदर अस्पताल में सात घंटे सिर्फ इसलिए रोका रखा गया क्योंकि पुलिस के मेडिकल जांच अनुरोध पत्र में केस नंबर दर्ज नहीं था. मामले की जानकारी पटना स्थित विकलांग अधिकार मंच नामक संस्था को लगने पर संस्था का एक दल मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल पहुंचा. संस्था के पदाधिकारियों नें जब सदर अस्पताल प्रबंधन पर दबाव डाला तब जाकर जांच की गई. इस मामले मे जब अस्पताल अधीक्षक डॉक्टर मेहंदी हसन से पूछा गया तो जबाब और भी संवेदनहीन रहा. उन्होने साफ कहा कि औपचारिकताएं पूरी किए बगैर कुछ नहीं किया जा सकता, चाहे इसमें कितनी भी देर हो जाए. डॉक्टर का संवेदनहीन बयान उनकी कार्यशैली की कहानी बयां कर रहा है.