सुप्रीम कोर्ट में बोले एटार्नी जनरल ‘भारत की समस्याएं अनगिनत हैं’

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सुप्रीम कोर्ट में एटार्नी जनरल 'भारत की समस्याएं अनगिनत हैं'
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सुप्रीम कोर्ट में एटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने जस्टिस मदन बी लोकुर की खंडपीठ में कहा कि भारत की समस्याएं अनगिनत हैं जबकि सरकार के पास संसाधन कम हैं और उसे कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है. वेणुगोपाल ने कहा कि अदालतें पर्यावरण, प्रदूषण और कूड़ा जैसे मुद्दों को लेकर दाखिल की जाने वाली पीआईएल पर आदेश जारी कर देती है, जबकि सरकार के पास संसाधन कम हैं और उसे आदेशो का पालन करने में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है.

एटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल की इस दलील पर कोर्ट ने उन्हें फटकार लगते हुए कहा ‘हम सरकार की आलोचना नहीं कर रहे हैं. कम से कम कोर्ट उनका समाधान खोजने की कोशिश तो कर रही है. हम जानते हैं कि समस्याएं हैं. हम भी इसी देश के नागरिक हैं. ऐसा न जताइए कि हम सरकार की आलोचना कर रहे हैं और उसे काम करने से रोक रहे हैं.’ सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण, पर्यावरण और कचरे की समस्या इतनी विकराल है कि इनको दरकिनार नहीं किया जा सकता.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश में गरीबी का आलम और सरकार के बजट खर्च करने की ये हालत है कि एक ओर तो लोगों के पास पहनने को कपड़ा और शिक्षा का बुनियादी इंतज़ाम तक नहीं है, लेकिन सरकार जनता को वाशिंग मशीन और लैपटॉप बांट रही है. क्या ये बजट का सही इस्तेमाल है? सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल ने कहा कि भारत तरह तरह की समस्याओं से जूझ रहा है. ऐसी हालत में न्यायपालिका को हर प्रकार की जनहित याचिका को समुचित तौर से सुनने की ज़रूरत है.

अटॉर्नी जनरल के दलील के जवाब में जस्टिस लोकुर ने कहा कि हमने भी बहुत सी ऐसी चीज़ें देखी हैं जिससे देश में तमाम समस्याओं के समाधान के लिए आवंटित बजट का इस्तेमाल तक नहीं किया गया. कोर्ट ने कहा कि हम अनुच्छेद 21 के तहत हर नागरिक के गरिमापूर्ण ढंग से जीने के अधिकार की रक्षा में जुटे हैं. हमने ऐसे कई मामलों में सरकार से अतिरिक्त धन आवंटन के आदेश भी दिए. कोर्ट ने कहा कि देश में कई संस्थान ऐसे हैं जिनकी देखरेख के लिए हमने कमेटी बनाकर काम तेजी से आगे बढ़ाने को कहा पर हुआ कुछ नहीं.