गंगा के लिए 111 दिन के अनशन के बाद प्रो. जीडी अग्रवाल का निधन

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गंगा 111 दिन अनशन बाद प्रो. जीडी अग्रवाल का निधन

गंगा की रक्षा के लिए 111 दिन से अनशन पर बैठे वैज्ञानिक से संत बने अनशनरत स्वामी ज्ञान स्वरूप सानन्द की गुरुवार को ऋषिकेश के एम्स हॉस्पिटल में दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई. प्रो अग्रवाल ने मंगलवार को जल भी त्याग दिया था, उनकी बिगड़ती हालात को देखते हुए प्रशासन ने उन्हें जबरन उठाकर ऋषिकेश के एम्स में भर्ती करवा दिया था. एम्स से ही गुरुवार सुबह 6.45 बजे स्वामी सानन्द ने हस्तलिखित प्रेस विज्ञप्ति जारी की थी. जिसमें उन्होंने अपना अनशन जारी रखने के लिए एम्स के डॉक्टरों द्वारा सहयोग किए जाने पर उनका धन्यवाद किया था. सानन्द ने लिखा था कि डॉक्टरों ने उन्हें कहा था कि उनके सामने उनका जीवन बचाने के लिए फोर्स फीडिंग का भी विकल्प है.

प्रोफेसर जी डी अग्रवाल अविरल गंगा के पैरोकार थे. गंगा को बांधों से मुक्त कराने के लिए कई बार आंदोलन कर चुके थे. मनमोहन सरकार के दौरान 2010 में उनके अनशन के परिणाम स्वरूप गंगा की मुख्य सहयोगी नदी भगीरथी पर बन रहे लोहारी नागपाला, भैरव घाटी और पाला मनेरी बांधों के प्रोजेक्ट रोक दिए गए थे, जिसे मोदी सरकार आने के बाद फिर से शुरू कर दिया. सरकार से इन बांधों के प्रोजेक्ट रोकने और गंगा एक्ट लागू करने की मांग को लेकर प्रोफेसर अग्रवाल 22 जून से अनशन पर थे. इस बीच कुछ केंद्रीय मंत्री, सांसद भी आकर उनसे अनशन समाप्त करने का अनुरोध कर चुके थे. मगर सानन्द ने गंगा के लिए संसद में कानून बनाने तक अनशन खत्म करने को तैयार नहीं थे.

प्रो जीडी अग्रवाल का जन्म 20 जुलाई 1932 को यूपी के मुजफ्फरनगर के कांधला में हुआ था. इनकी शुरुआती शिक्षा गांव के ही लोकल प्राइमरी स्कूल में हुई थी. इसके बाद इन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ रुड़की (IIT Roorkee) से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया. प्रो जीडी अग्रवाल केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में पहले सचिव के रूप में भी नियुक्त थे. प्रो जीडी अग्रवाल ने उत्तरप्रदेश सरकार में डिजाइन इंजीनियर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी. इसके अलावा उन्होंने राष्ट्रीय नदी संरक्षण निदेशालय के सलाहकार के रूप में भी उन्होंने अपनी सेवाएं दी थी. प्रो जीडी अग्रवाल यूनिवर्सिटी ऑफ रुड़की में भी विजिटिंग प्रोफेसर रहे थे.